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क्राइम

बारात लूट से क्रिमिनल बना बिकरू का ‘विकास’

2 जुलाई 2020 की आधी रात में चौबेपुर के बिकरू गांव में DSP और SO समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद सुर्खियों आई विकास दुबे के आतंक की कहानी 3 दशक से भी ज्यादा पुरानी थी. ज़रायम की दुनिया में विकास का नाम पुलिस और नेताओं के संरक्षण में पनपा था. वह तीन भाईयों… Continue reading बारात लूट से क्रिमिनल बना बिकरू का ‘विकास’

Vikas Image
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2 जुलाई 2020 की आधी रात में चौबेपुर के बिकरू गांव में DSP और SO समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद सुर्खियों आई विकास दुबे के आतंक की कहानी 3 दशक से भी ज्यादा पुरानी थी. ज़रायम की दुनिया में विकास का नाम पुलिस और नेताओं के संरक्षण में पनपा था. वह तीन भाईयों में सबसे बड़ा था, बचपन से लड़ाई-झगड़ा करने वाला था. बारात लूट की वारदात से गुनाह की दुनिया में उसने कदम रखा था. उसने 18 साल की उम्र में अपने चार साथियों के साथ मिलकर एक बारात को लूटा था. विकास दुबे शुरू से ही इतना शातिर दिमाग था कि उसने बारात में शामिल लोगो को डराने के लिए सड़क के किनारे लगी झाड़ियों में जगह जगह जलती हुई सिगेरट को सेट कर दिया था ताकि बारातियों को लगे कि गैंग में ओर लोग भी शामिल है. और इस तरह से उसने पूरी बारात को लूट लिया था. बता दे कि विकास ने अपने चार साथियों के साथ गैंग खड़ा किया था और इसको नाम दिया था ‘‘बुलेट गैंग’’ क्योंकि गैंग के सारे लोग बुलेट पर चला करते थे.

विकास तमंचा लेकर जाता था स्कूल

विकास दुबे बचपन से ही मारपीट करने लगा था. आपको ये भी बता दें कि वह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था. उसने केवल 12वीं तक ही पढ़ाई की थी. वह इतना आपराधिक प्रवृत्ति का था कि वो स्कूल में भी तमंचा लेकर जाता था. एक दिन इस बात का पता लगने पर स्कूल के प्रधानाचार्य ने उससे तमंचा लिया और उसकी पिटाई कर दी. जिससे गुस्साए विकास ने स्कूल से वापिस जाते हुए शिक्षकों को रोक लिया और उनकी पिटाई कर दी. 1990 को वो दौर जब राजनीति में मंडल-कमंडल का दौर चल रहा था और इलाके में दबंगई से नेताओं ने बंज़र ज़मीन का कब्ज़ाना शुरू कर दिया था. ऐसे में अच्छी खासी संख्या होने के बावजूद ब्राह्रमणों की ज़मीन खिसक रही थी. इसके बाद विकास दुबे ब्राह्रमण नेता के तौर पर सामने आया.

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