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Blood Not Meant For Sale: ‘खून बिक्री के लिए नहीं हैं, सरकार को क्यों लेना पड़ा फैसला?

Blood Not Meant For Sale: जैसे कि हम सभी जानते है कई मेडिकल स्थितियों खासकर इमरजेंसी के वक्त अक्सर रक्त की जरूरत पड़ती है. अब इस दौरान कुछ ब्लड सेंटर्स लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उन्हें महंगे दरों पर ब्लड मुहैया कराते हैं. गंभीर समस्या को सुलझाने के लिए हाल ही में ड्रग कंट्रोलर… Continue reading Blood Not Meant For Sale: ‘खून बिक्री के लिए नहीं हैं, सरकार को क्यों लेना पड़ा फैसला?

Blood not meant for Sale
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Blood Not Meant For Sale: जैसे कि हम सभी जानते है कई मेडिकल स्थितियों खासकर इमरजेंसी के वक्त अक्सर रक्त की जरूरत पड़ती है. अब इस दौरान कुछ ब्लड सेंटर्स लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उन्हें महंगे दरों पर ब्लड मुहैया कराते हैं. गंभीर समस्या को सुलझाने के लिए हाल ही में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने बड़ा कदम उठाया है.

“रक्त बिक्री के लिए नहीं है, यह केवल आपूर्ति के लिए है”

देश में मामूली दरों पर ब्लड की बिना रुकावट सप्लाई को सुनिश्चित करने के लिए DCGI ने एक सख्त निर्देश जारी किया है जिसके दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि ब्लड सेंटर्स रक्त के लिए प्रीमियम शुल्क न लें.

DCGI ने कहा कि “रक्त बिक्री के लिए नहीं है, यह केवल आपूर्ति के लिए है” इसलिए ब्लड सेंटर्स अब सिर्फ ब्लड और रक्त कंपोनेंट्स की सप्लाई और प्रोसेसिंग कॉस्ट के लिए शुल्क ले सकते हैं.

रक्त केंद्रों द्वारा अधिक शुल्क वसूलने के मुद्दे पर लिया गया फैसला

आपको बता दें कि पूरे देश में रक्त की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए और वह भी नाममात्र दरों पर, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि रक्त केंद्र रक्त के लिए प्रीमियम न लें।


डीसीजीआई ने कहा, “रक्त बिक्री के लिए नहीं है, यह केवल आपूर्ति के लिए है” और इस प्रकार रक्त केंद्र अब केवल रक्त और रक्त घटकों की आपूर्ति और प्रसंस्करण लागत के लिए शुल्क ले सकते हैं।

अब आदेश के मुताबिक, सितंबर 2023 में 62वीं औषधि सलाहकार समिति द्वारा रक्त की आपूर्ति पर रक्त केंद्रों द्वारा अधिक शुल्क वसूलने के मुद्दे पर विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया।

खून संबंधी अवयवों के लिए प्रसंस्करण शुल्क लगाया जा सकता है

आपको बता दें कि संशोधित दिशा-निर्देश में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि ब्लड और खून संबंधी अवयवों के लिए सिर्फ प्रसंस्करण शुल्क लगाया जा सकता है. जिसकी कीमत खून या खून से संबंधित अवयवों के लिए 250 रुपये से लेकर 1550 रुपये होती है. डीसीजीआई ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के दवा नियंत्रकों से कहा है कि, वह अपने अधिकार क्षेत्र के तहत सभी रक्त केंद्रों को संशोधित दिशानिर्देशों का पालन करने का निर्देश दें.

खून बेचने वाले ब्लड बैंकों के खिलाफ होगी कार्रवाई

इसके साथ ही आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, रक्तदान न करने की स्थिति में निजी अस्पतालों द्वारा प्रति यूनिट रक्त की कीमत 3,000 रुपये से 8,000 रुपये के बीच रखी जाती है. रक्त की कमी या दुर्लभ रक्त समूहों के मामलों में, यह शुल्क ज्यादा हो सकता है. प्लाज्मा व प्लेटलेट्स के लिए 400 रुपये प्रति पैक फीस ली जा सकती है.

  • देश में हर साल लगभग 250 सीसी की 4 करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है, जबकि सिर्फ 5 लाख यूनिट ब्लड ही मुहैया हो पाता है।
  • इमरजेंसी के समय जैसे जब किसी नवजात बालक या अन्य को खून की आवश्यकता हो तो उसका ब्लड ग्रूप न पता हो तब उसे ओ निगेटिव ब्लड दिया जा सकता है।
  • आंकड़ों के मुताबिक, 25 परसेंट से ज्यादा लोगों को अपने जीवन में खून की जरूरत पड़ती है।

25% से ज्यादा लोगों को पड़ती है खून की जरूरत

देश में औसतन कितने लोगों को रक्त की जरूरत पड़ती है यो सबसे अहम सवाल उठता है. तो आइए जानते है देश में औसतन रक्त की जरूरत वोले के आंकड़ो के बारे में. आंकड़ों के मुताबिक 25 परसेंट से ज्यादा लोगों को अपने जीवन में खून की जरूरत पड़ती है।

तो वहीं भारत में हर साल 1.1 करोड़ ब्लड डोनेशन होते हैं. आपको बता दें कि कई बार मरीजों के शरीर में खून की मात्रा इतनी कम हो जाती है कि उन्हें किसी और व्यक्ति से ब्लड लेने की जरूरत पड़ जाती है. ऐसा माना जाता है कि एक व्यक्ति ब्लड डोनेट करके कम से कम 3 लोगों की जान बचा सकता है.

भारत में प्रति 10 लाख आबादी पर ब्लड बैंक

देश के ब्लड के आंकडों के मुताबिक देश में औसतन प्रति 10 लाख की आबादी पर इस वक्त 2.78 ब्लड बैंक मौजूद है. मगर इसमें देश के कई बड़े राज्यों का औसत देश के राष्ट्रीय औसत से नीचे है.

इनमें सबसे खराब स्थिति बिहार (0.85) की है, जहां पर प्रति 10 लाख आबादी पर ब्लड बैंक की उपलब्धता एक से भी कम हैं. इस सूची में गुजरात (2.55), राजस्थान (2.48), असम (2.41), मध्य प्रदेश (2.05), उड़ीसा (1.90), उत्तर प्रदेश (1.82), झारखंड (1.70) और पश्चिम बंगाल (1.55) शामिल हैं.

ब्लड डोनेशन से जुड़े कुछ जरूरी फैक्ट्स

चलिए जानते है ब्लड डोनेशन से जुड़े फैक्ट्स के बारे में. जो आप सबके लिए जानना बेहद जरूरी है.

  • आपको बता दें कि 18 साल से ज्यादा उम्र के स्त्री-पुरुष, जिनका वजन 50 किलो या उससे ज्यादा हो, एक साल में तीन-चार बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं।
  • इसके साथ ही ब्लड डोनेट करने योग्य लोगों में से अगर मात्र 3% भी खून दें तो देश में ब्लड की कमी पूरी तरह से दूर हो सकती है।
  • आप जानकर आश्चर्यचकित होंगे कि 79 देशों ने अपनी ब्लड सप्लाई का 90 परसेंट वॉलट्री ब्लड डोनर्स से लिया है, तो वहीं 56 देशों ने आधे से ज्यादा ब्लड फैमिली, रिप्लेसमेंट या पेड डोनर्स से लिया।
  • आपको बता दें कि एक बार ब्लड डोनेशन से आप 3 लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं।
  • ब्लड डोनेशन में सिर्फ 1 यूनिट ब्लड ही लिया जाता है।
  • इसके साथ ही भारत में सिर्फ 7% लोगों का ब्लड ग्रूप ओ निगेटिव है।
  • बता दें ओ निगेटिव ब्लड ग्रूप यूनिवर्सल डोनर कहलाते है, इसे किसी भी ब्लड ग्रूप के व्यक्ति को दिया जा सकता है।
  • देश में हर साल लगभग 250 सीसी की 4 करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है, जबकि सिर्फ 5 लाख यूनिट ब्लड ही मुहैया हो पाता है।
  • आपको बता दें कि, इमरजेंसी के वक्त जब किसी नवजात शिशू या अन्य को खून की आवश्यकता हो तो उसका ब्लड ग्रूप न पता हो तब उसे ओ निगेटिव ब्लड दिया जा सकता है।
  • आंकड़ों के मुताबिक, 25% से ज्यादा लोगों को अपने जीवन में खून की जरूरत पड़ती है।

25% से ज्यादा लोगों को पड़ती है खून की जरूरत

देश में औसतन कितने लोगों को रक्त की जरूरत पड़ती है यो सबसे अहम सवाल उठता है. तो आइए जानते है देश में औसतन रक्त की जरूरत वोले के आंकड़ो के बारे में. आंकड़ों के मुताबिक 25 परसेंट से ज्यादा लोगों को अपने जीवन में खून की जरूरत पड़ती है.

तो वहीं भारत में हर साल 1.1 करोड़ ब्लड डोनेशन होते हैं. आपको बता दें कि कई बार मरीजों के शरीर में खून की मात्रा इतनी कम हो जाती है कि उन्हें किसी और व्यक्ति से ब्लड लेने की जरूरत पड़ जाती है. ऐसा माना जाता है कि एक व्यक्ति ब्लड डोनेट करके कम से कम 3 लोगों की जान बचा सकता है.

भारत में प्रति 10 लाख आबादी पर ब्लड बैंक

देश के ब्लड के आंकडों के मुताबिक देश में प्रति 10 लाख की आबादी पर इस वक्त 2.78 ब्लड बैंक मौजूद है. मगर इसमें देश के कई बड़े राज्यों का औसत देश के राष्ट्रीय औसत से नीचे है.

इनमें सबसे खराब स्थिति बिहार (0.85) की है, जहां पर प्रति 10 लाख आबादी पर ब्लड बैंक की उपलब्धता एक से भी कम हैं. इस तरह गुजरात में 2.55, राजस्थान में 2.48, असम में 2.41, मध्य प्रदेश में 2.05, उड़ीसा में 1.90, उत्तर प्रदेश में 1.82, झारखंड में 1.70 और पश्चिम बंगाल में 1.55 ब्लड बैंक मौजूद हैं.