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रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का दिन बेहद करीब ,जानिए मूर्ति की खासियत

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का दिन बेहद करीब आ गया है. जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा अयोध्या मंदिर में की जानी है. उसे कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाया है. जिसे देखने के लिए राम भक्त काफी उत्सुक नजर आ रहें हैं क्योंकि वे अपने प्रभु राम की एक झलक देखना चाहते… Continue reading रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का दिन बेहद करीब ,जानिए मूर्ति की खासियत

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का दिन बेहद करीब आ गया है. जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा अयोध्या मंदिर में की जानी है. उसे कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाया है. जिसे देखने के लिए राम भक्त काफी उत्सुक नजर आ रहें हैं क्योंकि वे अपने प्रभु राम की एक झलक देखना चाहते है जिससे वो जान सकें की उनके प्रभु राम बाल्यकाल में कैसे नजर आते थे तो आज हम आपके सामने प्रभु राम की उसी छवि का जिक्र करने वाले है जिनका चयन अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए किया गया है.
22 जनवरी को भगवान राम अपने बाल्यरूप में अयोध्या मंदिर में विराजेंगे, जिसके लिए कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज के मूर्ति का चयन हुआ है अगर हम मूर्ति की छवि का जिक्र करें तो, मस्तक सुंदर आंखें बड़ी और ललाट भव्य भुजाएं घुटनों तक लंबी…माथों पर मुकुट, हाथ में तीर और धनुष मूर्ति में 5 साल के बच्चे की सुलभ कोमलता दिखती है. जिसे देख भक्त एक ही पल में अपने प्रभु में खो जाएंगे और उनकी नजर उनपर स्थिर हो जाएगी.

मूर्ति की खासियत

मूर्ति की खासियत की जिसे जानने के बाद आप भी सोचने के मजबूर हो जाएंगे. आखिर क्यों कर्नाटक के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज को रामलला की अचल मूर्ति गढ़ने में तकरीबन सात महीने लग गये. बता दें कि मैसूर के प्रसिद्ध मूर्तिकारों की पांच पीढ़ियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले अरुण योगीराज वर्तमान में देश में सबसे अधिक डिमांड वाले मूर्तिकार हैं. अरुण वह मूर्तिकार हैं, जिनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सराहना कर चुके हैं. अरुण के पिता योगीराज भी एक कुशल मूर्तिकार हैं. उनके दादा बसवन्ना शिल्पी को मैसूर के राजा का संरक्षण प्राप्त था. अरुण को बचपन से ही मूर्ति बनाने का शौक था. अरुण ने एमबीए किया है. इसके बाद वो एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगे, लेकिन मूर्तिकला को नहीं भूल पाए आखिरकार साल 2008 में जॉब छोड़कर उन्होंने मूर्तिकला में कॅरियर बनाने का रिस्क लिया उनका रिस्क सफल रहा और वे देश के जाने माने मूर्तिकार बन गए.

500 किलोग्राम का नगाड़ा भी पहुंच गया अयोध्या


अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर सभी भक्त काफी उत्सुक नजर आ रहे है और इसमें शामिल होने के लिए दूर दूराज से कई भक्त पैदल ही निकल पड़े है. वहीं देश के कोने-कोने से मंदिर के लिए नायाब चीजें भेजी जा रही हैं. अहमदाबाद में तैयार हुए ध्वज दंड के बाद अब 500 किलोग्राम का नगाड़ा भी अयोध्या पहुंच गया है. इसे विशेष रथ से अहमदाबाद से अयोध्या लाया गया है.
500 किलो के इस भव्य नगाड़े में लोहे और तांबे की प्लेट का इस्तेमाल किया गया है. साथ ही सोने की पर्त का भी इस्तेमाल किया गया है. ताकि नगाड़े को हजारों सालों की उम्र दी जा सके अखिल भारतीय डगबर समाज द्वारा श्रीराम मंदिर के लिए 500 किलोग्राम का विशेष नगाड़ा बनाया गया है. नगाड़े को बनाने वाले डगबर समाज के 4 लोग श्रीराम लला प्राण प्रतिष्ठा के दिन इसे मंदिर में बजाएंगे.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने कहा कि ये भारत की एक कला है. हमारी कोशिश है कि यह जिंदा रहे और इसे प्रोत्साहन मिले.

आपको बता दें कि इससे पहले एटा के कारीगरों द्वारा निर्मित 2400 किलो का घंटा भी चर्चा का विषय बना हुआ है. घंटी उद्योग की नगरी एटा के जलेसर से ये घंटा अयोध्या पहुंचा है. अष्टधातु के इस घंटे को सैकड़ों व्यापारी फूलों से सजे रथ में अयोध्या लाए हैं. इसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को समर्पित किया गया. इस घंटे की आवाज शांत माहौल में करीब 2 किमी तक सुनाई दे सकती है.

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