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Supreme Court On Reservation: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी- जिन्हें मिल चुका आरक्षण का लाभ, उन्हें निकल जाना चाहिए बाहर

Supreme Court on Reservation: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उन जातियों को अधिक पिछड़ों के लिए रास्ता तैयार करना चाहिए, जो आरक्षण का लाभ ले चुके हैं. इसके बाद इस विषय पर नए सिरे से बहस शुरू हो सकती है.

Supreme Court on Reservation
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Supreme Court On Reservation: जाति के आधार पर सरकारी नौकरी में आरक्षण को लेकर अक्सर बहस होती रहती है. कुछ लोग जाति आधारित आरक्षण के पक्ष में हैं तो कुछ इसके विरोध में. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपनी अहम टिप्पणी में कहा कि पिछड़ी जातियों में जो लोग आरक्षण (Reservation) के हकदार थे और वह इसका लाभ उठा चुके हैं, उन्हें अब आरक्षण वर्ग से बाहर निकल जाना चाहिए.

नए सिरे से शुरू हो सकती है बहस

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी जातियों को अधिक पिछड़ों के लिए रास्ता तैयार करना चाहिए. बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद इस पर नए सिरे से बहस शुरू हो सकती है. वैसे यह चर्चा अक्सर होती है कि जो जातियां संपन्न हैं उन्हें आरक्षण छोड़ देना चाहिए.

क्या राज्य सरकार की शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए SC-ST में उप-वर्गीकरण करने का अधिकार है? के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट के 7 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मंगलवार को इस कानूनी सवाल की समीक्षा शुरू कर दी है. भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई, विक्रम नाथ, बेला एम त्रिवेदी, पंकज मिथल, मनोज मिश्रा और सतीश चंद्र शर्मा शामिल हैं.

किन जातियों को आरक्षण से निकलना चाहिए बाहर

इस बीच मंगलवार को सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह की दलीलों का सारांश देते हुए कहा कि इन जातियों को बाहर क्यों नहीं निकालना चाहिए? सुप्रीम कोर्ट उन 23 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिसमें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले को चुनौती दे दी गई है। इसमें पंजाब सरकार की मुख्य अपील भी शामिल है.

CJI दे चुके हैं टिप्पणी

यह अलग बात है कि संविधान पीठ की अगुवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ सुनवाई के दौरान यह साफ कर दिया कि वह सिर्फ मात्रात्मक डेटा से संबंधित तर्कों में नहीं पड़ेगी जिसके चलते पंजाब सरकार को कोटा के अंदर 50 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना पड़ा.

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