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PM MODI का गुजरात में रोड शो, UAE के राष्ट्रपति भी होंगे साथ, क्या हैं मायने ?

अहमदाबाद: एक बार फिर अद्भुत नजारा अहमदाबाद की सड़कों पर दिखाई देगा, लेकिन इस बार डोनाल्ड ट्रंप या अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन नहीं, बल्कि UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान पीएम मोदी के साथ रोड शो करेंगे और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह मौका वाइब्रेंट गुजरात समिट का है, जो… Continue reading PM MODI का गुजरात में रोड शो, UAE के राष्ट्रपति भी होंगे साथ, क्या हैं मायने ?

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अहमदाबाद: एक बार फिर अद्भुत नजारा अहमदाबाद की सड़कों पर दिखाई देगा, लेकिन इस बार डोनाल्ड ट्रंप या अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन नहीं, बल्कि UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान पीएम मोदी के साथ रोड शो करेंगे और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह मौका वाइब्रेंट गुजरात समिट का है, जो पीएम मोदी के लिए बेहद खास है.

भारत ने कूटनीति के जरिए दुनियाभर के UAE सहित कई देशों में अपनी एक गहरी छाप छोड़ी

वैसे तो भारत ने कूटनीति के जरिए दुनियाभर के कई देशों में अपनी एक गहरी छाप छोड़ी है. लेकिन बात जब भी खाड़ी इलाके की आती है तब यहाँ के देश भारत के इस्तक़बाल में कालीन बिछाए खड़े रहते हैं. मतलब साफ है कि यहाँ के देश भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंध को मजबूत करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं. यही वजह है कि संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे मजबूत देश भी भारत के साथ अपने रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए पाकिस्तान जैसे इस्लामिक देश को भी दरकिनार कर देते हैं. इसमें UAE आलम तो यह है कि भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद PM नरेंद्र मोदी खाड़ी देश का पाँच बार दौरा कर चुके है.

वहीं UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के आपसी अंडरस्टैंडिंग को इस तरह समझिए कि UAE के प्रेसिडेंट पीएम मोदी को अपना बड़ा भाई मानते हैं और यह उनकी चौथी यात्रा है. जो भारत की सरजमीं पर मुक़म्मल हुई है. दरअसल बीते करीब एक दशक से दोनों देशों के बीच दोस्ती का सिलसिला दस्तूर बा दस्तूर मजबूत होता जा रहा है और इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है.

बीते साल जब प्रधानमंत्री मोदी यूएई गए थे, तब यूएई प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद आबूधाबी एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री के इस्तक़बाल में निगाहें बिछाए खड़े थे. इससे यह बात साफ है कि दोनों देशों के बीच रिश्ता मजबूत हुआ है.

भारत और UAE का रिश्ता बना नया मील का पत्थर

दोनों देशों के बीच अपनी-अपनी मुद्रा में कारोबार का एलान के बाद भारत और UAE का रिश्ता नया मील का पत्थर माना जा रहा है. नरेंद्र मोदी पिछले 9 साल से प्रधानमंत्री हैं. अपने अबतक के शासन के दौरान उन्होंने खाड़ी देशों से भारत के संबंधों को बढ़ाने पर खासा ध्यान दिया है.

2014 में जब मोदी प्रधानमंत्री बने तो 2002 के गुजरात दंगों को लेकर खाड़ी देशों में बनी उनकी छवि से लग रहा था कि इसका असर भारत के साथ उनके संबंधों पर पड़ सकता है.लेकिन इसके उलट उन्होंने खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को मज़बूत बनाने का कदम उठा कर चौंकाया है.

PM मोदी ने किया UAE सहित इस्लामिक देशों से संबंधों को मज़बूत

PM मोदी ने अपने शासन खाड़ी के इस्लामिक देशों से संबंधों को मज़बूत करने को काफ़ी गंभीरता से लिया है. जब मोदी ने अगस्त 2015 में यूएई का पहला दौरा किया तो यह पिछले 34 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा था. मोदी से पहले 1981 में इंदिरा गांधी ने यूएई का दौरा किया था. मोदी की विदेश नीति में यूएई को दी जा रही प्राथमिकता की झलक है. 2017 में गणतंत्र दिवस के मौक़े पर मिली. उस समय मोदी सरकार ने मोहम्मद बिन ज़ाएद अल नाह्यान को ही चीफ़ गेस्ट के रूप में न्योता दिया था.

भारत आखिर UAE में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा है?

अब आपके जेहन में एक सवाल आ रहा होगा कि भारत आखिर यूएई में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा है तो इसकी वजह है कि जैसे सऊदी अरब अर्थव्यवस्था में विविधिता लाने की कोशिश कर रहा है. वैसे ही यूएई भी अपनी अर्थव्यवस्था में विविधिता लाना चाहता है. वो भी अपनी अर्थव्यवस्था को केवल तेल निर्यात नहीं रखना चाहता बल्कि अब वो अपना ध्यान खाद्य व्यापार, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, और रियल स्टेट पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहता है.

इस तरह यूएई तेल आधारित अर्थव्यवस्था पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है. इसलिए वो दुनिया भर में निवेश के लिए नए ठिकाने ढूंढ रहा है. यूएई का इरादा साल 2031 तक अपने बिजनेस मोडेल को बढ़ाकर दुगना करने का है और इस कवायद में वो भारत को एक भरोसेमंद भागीदार मानता है और इसी के चलते वो भारत में निवेश करके भारतीय पेशेवरों की तरह उनके बिसनेज मोडेल का लाभ उठाना चाहता है. यूएई की दिलचासपी भारत के हथियारों में भी खूब है. वो भारत से ब्रह्मोस जैसे मिसाइल खरीदना चाहता है.जानकारों के मुताबिक यूएई भारत देश का एक हम साझेदार है और वैश्विक बिरदारी में यह भारत के लिए बहुत मायने रखता है.

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