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क्या होता है प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान?, कैसे रामलला विराजेंगे गर्भग्रह में

सनातन धर्म में मूर्ति पूजा का विशेष महत्व है, हर मूर्ति की पूजा नहीं की जा सकती है, पूजने योग्य बनाने के लिए पहले मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करनी होती है, इसके लिए एक खास विधि अपनाई जाती है. प्राण प्रतिष्ठा को आसान शब्दों में समझें तो एक मूर्ति में प्राण फूंके जाते हैं माने… Continue reading क्या होता है प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान?, कैसे रामलला विराजेंगे गर्भग्रह में

सनातन धर्म में मूर्ति पूजा का विशेष महत्व है, हर मूर्ति की पूजा नहीं की जा सकती है, पूजने योग्य बनाने के लिए पहले मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करनी होती है, इसके लिए एक खास विधि अपनाई जाती है. प्राण प्रतिष्ठा को आसान शब्दों में समझें तो एक मूर्ति में प्राण फूंके जाते हैं माने कि जिस भी देवी या देवता की मूर्ति हमें प्रतिस्थापित करनी है पहले उसमें उसी देवता की ऊर्जा का स्वरूप स्थापित करना पड़ता है. इस प्रक्रिया के बाद मूर्ति जीवंत यानि कि जीवित हो उठती है.

क्या होती है प्राण प्रतिष्ठा

हमने अक्सर पंडित या कहें धर्म के जानने वालों के मुंह से सुना है कि मूर्ति में प्राण होते हैं. यही प्राण फूंकने के लिए सबसे पहले मूर्ति को गंगा जैसी नदियों के पवित्र जल से औपचारिक स्नान कराया जाता है. फिर मूर्ति को नए कपड़ों से सजाया जाता है और उसे निर्धारित स्थान पर रखा जाता है, जहां इसे चंदन के लेप से सजाया जाता है. अभिषेक स्वयं बीज मंत्रों के जाप के माध्यम से होता है, जो एक ऐसा आह्वान होता है जो मूर्ति को दिव्य और जीवन शक्ति से भर देता है.

इस अनुष्ठान में पुजारियों और आचार्यों की भागीदारी शामिल होती है जो मूर्ति के विभिन्न हिस्सों को छूते हैं और निरंतर मंत्र उच्चारण से देवताओं का आवाहन करते हैं. इसके बाद सुगंधित जल और फूलों के साथ दिव्य नेत्र खोलने से अभिषेक प्रक्रिया समाप्त होती है. इसके बाद, आरती की जाती है, और भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है. इसके बाद ही यह पवित्र समारोह पूर्ण होता है.

राम मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में बहुत कुछ करना पड़ता है. इसलिए पूजा पहले से प्रारंभ हो जाएगी. 14 जनवरी को खरमास खत्म हो जाएगा तो 15 या 16 जनवरी से वो कार्यक्रम शुरू हो जाएगा. इसमें पहले तमाम देवी देवताओं पूजा होती है. नवग्रह की पूजा होती और दिशाओं की पूजा होती है. इसके बाद मूर्ति का नगर भ्रमण कराना होता है, नहीं तो परिसर भ्रमण कराएंगे.

किस दिन क्या है कार्यक्रम ?

16 जनवरी- इस दिन से रामलला के विग्रह के अधिवास का अनुष्ठान भी शुरू हो जाएगा.
17 जनवरी- इस दिन से रामलला की प्रतिमा को नगर भ्रमण के लिए निकाला जाएगा.
18 जनवरी- इस दिन से प्राण-प्रतिष्ठा की विधि आरंभ होगी. मंडप प्रवेश पूजन, वास्तु पूजन वरुण पूजन, विघ्नहर्ता गणेश पूजन और मार्तिका पूजन होगा.
19 जनवरी- राम मंदिर में यज्ञ अग्नि कुंड की स्थापना की जाएगी. खास विधि द्वारा अग्नि का प्रज्वलन होगा.
20 जनवरी- राम मंदिर के गर्भगृह को 81 कलश, जिसमें अलग-अलग नदियों के जल इक्ट्ठा किए हैं उनसे पवित्र किया जाएगा. वास्तु शांति अनुष्ठान होगा.
21 जनवरी- इस दिन यज्ञ विधि में विशेष पूजन और हवन के बीच राम लला का 125 कलशों से दिव्य स्नान होगा.
22 जनवरी- रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है. इस दिन मध्यकाल में मृगशिरा नक्षत्र में रामलला की महापूजा होगी.