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अयोध्या में दुनिया का सबसे बड़ा जलेगा दीपक

अयोध्या में अगामी 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है. इस समारोह को भव्य बनाने की तैयारी चल रही है. जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा दीपक भी जलेगा इस दीपक के लिए 21 क्विंटल तेल और सवा क्विंटल बाती का इस्तेमाल होगा बताया जा रहा है कि इस दीपक को 108 लोगों की… Continue reading अयोध्या में दुनिया का सबसे बड़ा जलेगा दीपक

अयोध्या में अगामी 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है. इस समारोह को भव्य बनाने की तैयारी चल रही है. जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा दीपक भी जलेगा इस दीपक के लिए 21 क्विंटल तेल और सवा क्विंटल बाती का इस्तेमाल होगा बताया जा रहा है कि इस दीपक को 108 लोगों की एक टीम ने बनाई है… एक अनुमान के मुताबिक, इस दीपक को जलाने में करीब साढ़े 7 करोड़ रुपए खर्च होंगे.
रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान अयोध्या में सबसे बड़ा दीपक जलेगा… इस दीपक का नाम प्रभु श्रीराम के पिता महाराज दशरथ के नाम पर दशरथ दीप रखा गया है. दीपक का व्यास 28 मीटर होगा. इसे रामघाट के तुलसीबाड़ी में 21 क्विंटल तेल डालकर जलाने की तैयारी की जा रही है.

जगदगुरु परमहंस आचार्य अयोध्‍या की तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर हैं. वह मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं, लेकिन उनके माता-पिता बिहार से मध्य प्रदेश चल गए थे. इस दौरान परमहंस भी अपने माता-पिता के साथ मध्य प्रदेश के सीधी जिले में रहने लगे थे. करीब 33 से 34 साल पहले परमहंस का परिवार अयोध्या में गोपाल दास जी महाराज के मंदिर में आया था. उस वक्त परमहंस की उम्र महज 17 साल थी. जिसके बाद से परमहंस वापस नहीं गए और सरयू किनारे कुटिया बनाकर रहे लगे.

राम के स्वागत के लिए अलग-अलग रंग



प्रभु राम की नगरी अयोध्या में प्रभु राम के स्वागत के लिए अलग-अलग रंग नजर आ रहा है. प्राण प्रतिष्ठा के लिए पूरे अयोध्या को त्रेतायुग की थीम से सजाया जा रहा है. अयोध्या के चौक-चौराहे से लेकर मठ- मंदिरों और सड़कों पर खूबसूरत लाइट लगाया जा रहा है. इस दौरान भगवान राम की नगरी में सैंड आर्ट के जरिए भगवान की खूबसूरत झांकी भी बनाई जा रही है. जिसमें भगवान राम वनवासी मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं. इस झांकी में राम मंदिर, गिलहरी, राम सेतु जैसे कई प्रसंग झांकियों के रूप में दिखाई देंगे.
अयोध्या में दीवापली से पहले पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है… इस बीच बलिया के सैंड आर्टिस्ट ने रामायण के प्रति अपनी श्रद्धा का प्रदर्शन करते हुए रामायण के घटनाक्रमों को रेत पर उकेरा है.

आपको बता दें कि रुपेश सिंह ने रामायण की जिस संवाद का जिक्र रेत पर किया है. वो राम सेतु के दौरान का है. जब एक छोटी सी गिलहरी अपने शरीर पर बालू लपेटकर समुद्र में डाल रही है. जिसे देख भगवान राम अभिभूत हो जाते है और वो उसकी पीठ पर हाथ फेरते है. जिससे उसकी शरीर पर तीन रेखा खिंच जाता है. यानी गिलहरी की शरीर पर जो तीन रेखाएं हैं वो प्रभु राम का आशीर्वाद है.
रुपेश सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया का निवासी है उन्होंने वाराणसी से फाइन आर्ट की पढ़ाई की है. वे इससे पहले भी कई मौके पर अपनी कलाकृतियों से लोगों को हैरान कर चुके है चाहे वह चंद्रयान के मौके पर बनाई गई कलाकृति हो या भगवान राम से संबंधित अन्य कोई कलाकृति उन्होने हर मौके पर लोगों को हैरान किया है.

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