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राजनीति

यूपी में सियासी घमासान-अखिलेश और मायावती के बीच राजनीतिक उलझन

उत्तर प्रदेश में सियासी तरंगों में बड़ी बदलावारी देखने को मिल रही है. अब तक जो अखिलेश यादव मायावती की गढ़ी गई गारंटियों पर सवाल उठा रहे थे, उनका स्टैंस अब बदल गया है. उनके नए दृष्टिकोण ने काफी चर्चा को उत्तेजित किया है. अखिलेश यादव ने सपा की बैठक के दौरान मायावती का सम्मान… Continue reading यूपी में सियासी घमासान-अखिलेश और मायावती के बीच राजनीतिक उलझन

उत्तर प्रदेश में सियासी तरंगों में बड़ी बदलावारी देखने को मिल रही है. अब तक जो अखिलेश यादव मायावती की गढ़ी गई गारंटियों पर सवाल उठा रहे थे, उनका स्टैंस अब बदल गया है. उनके नए दृष्टिकोण ने काफी चर्चा को उत्तेजित किया है. अखिलेश यादव ने सपा की बैठक के दौरान मायावती का सम्मान करते हुए कहा है कि यदि वह ‘इंडिया गठबंधन’ में शामिल होती हैं, तो इससे उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी. इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या अखिलेश ने मायावती के सामने अपनी पकड़ हार दी है. यहां उनके नए रुख़ की क्या वजह है, इसका पता करना महत्वपूर्ण है.

मंगलवार को यूपी में सीट शेयरिंग पर हुई वार्ता

मंगलवार को यूपी में सीट शेयरिंग पर वार्ता हुई थी, जिसमें अखिलेश यादव ने मायावती को सम्मान दिखाते हुए उनके साथ काम करने की बात की. सपा अध्यक्ष ने कहा, “मायावती वरिष्ठ नेता हैं, हम सब उनका सम्मान करते हैं, और उनके खिलाफ कोई बयान नहीं दें.” यह उनके सुर बदलते जा रहे हैं और सवाल उठ रहा है कि क्या इससे पहले जो अखिलेश यादव, मायावती के खिलाफ सवाल उठा रहे थे, उन्हें अब उनकी गारंटी में कोई बदलाव हुआ है.

अखिलेश यादव का कहना है कि वह बीजेपी को हराने के लिए सभी के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं और मायावती के आने से मोदी विरोधी वोट एकजुट हो सकते हैं. इससे यह सुझाव दिया जा रहा है कि इससे इंडिया गठबंधन को फायदा हो सकता है.

कांग्रेस भी चाहती है कि गठबंधन को मजबूत बनाना

कांग्रेस भी चाहती है कि गठबंधन को मजबूत बनाने के लिए बसपा को भी साथ लाया जाए. अखिलेश यादव भी इस पर सहमत हैं और उनके नए रुख़ की पीछे यह कारण हो सकता है. इसके बावजूद, बीजेपी का कहना है कि इससे कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जानकारों का कहना है कि मायावती के आने से इंडिया गठबंधन की सीटों पर असर पड़ सकता है.”

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