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राजनीति

नीतीश कुमार की ‘नीति’…सीटें कम फिर भी सीएम

हरियाणा के चौधरी भजनलाल से राजनीति में शुरू हुई आयाराम-गयाराम की पौध को अगर किसी ने शिद्दत से पाला पोसा और सींचा है तो वो कोई ओर नहीं बल्कि बिहार में 9वीं बार मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार है. दरअसल नीतीश कुमार की नीति ऐसी है, कि वो सत्ता में बने रहने के… Continue reading नीतीश कुमार की ‘नीति’…सीटें कम फिर भी सीएम

नीतीश कुमार IMAGE
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हरियाणा के चौधरी भजनलाल से राजनीति में शुरू हुई आयाराम-गयाराम की पौध को अगर किसी ने शिद्दत से पाला पोसा और सींचा है तो वो कोई ओर नहीं बल्कि बिहार में 9वीं बार मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार है. दरअसल नीतीश कुमार की नीति ऐसी है, कि वो सत्ता में बने रहने के लिए कभी भी और किसी भी बहाने से पलटी मार लेते है. उसमें भी सबसे बड़ी बात ये है कि पलटी मारने के बाद नीतीश कुछ ऐसी रणनीति बनाते है कि सीटें कम होने के बावजूद भी सीएम बन जाते है.

राजनीतिक गलियारों में इसी बात की चर्चाएं ज़ोरों पर है कि आखिरकार ऐसी क्या वजह है कि सीटें कम होने के बाद नीतीश कुमार की ताजपोशी हो जाती है. कोई मानता है कि गठबंधन वाले अन्य दलों की नज़रें नीतीश कुमार के अति पिछडों और महिलाओं के असरदार वोट बैंक के उपर रहती है. यही वजह है कि नीतीश कुमार के साथ गठबंधन NDA का हो या फिर राजद सभी उनकी शर्ते मान भी लेते है.

2020 के विधानसभा चुनाव के नतीजे नीतीश कुमार के पक्ष में नहीं थे लेकिन इसके बावजूद वो सीएम बन गए. चुनाव के नतीजे आए तो उसमें राजद 79 सीटें लेकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी जबकि भाजपा 74 सीटों के साथ दूसरें नंबर पर थी और जदयू को 43 सीटें मिली. चूंकि भाजपा राजद के साथ जा नहीं सकती थी. इसलिए 43 सीटें पाने वाले नीतीश बाबू के साथ सरकार बनाई और उनको सीएम बनाया. 2022 में NDA से नाता तोड़कर नीतीश कुमार ने महज़ एक घंटे में 79 सीटों वाली आरजेडी, कांग्रेस और वामदलों के साथ सरकार बना ली. और एक बार फिर NDA में वापसी करके नीतीश सीएम बन गए. यानि 43 सीटों से ही नीतीश कुमार 2020 से अब तक तीसरी बार मुख्यमंत्री बन गए.

जदयू की सीटों में रहा उतार-चढ़ाव

1951 से लेकर 2020 तक बिहार में 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके है. 2000 में समता पार्टी के बैनर तले चुनाव में गए नीतीश कुमार को 34 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि समता पार्टी से जनता दल युनाईटेड बनने के बाद कुछ विधानसभा चुनावों में सीटों में लगातार उतार-चढ़ाव चलता रहा. और 115 सीटें जीतने वाली जदयू 2020 के चुनाव में 43 सीटों पर सिमट गई. अब सवाल ये है कि क्या नीतीश के बार-बार पलटी मारने से बिहार की जनता आजिज़ आ चुकी है, या फिर सर्व समाज में उनकी लोकप्रियता पर भी असर पड़ा है.

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2005 में जेडीयू के 55 विधायक जीते, फिर 2010 में जेडीयू 115 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, इसके बाद 2015 में आरजेडी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और 71 सीटें जीते. 2020 में जेडीयू के हिस्से में केवल 43 सीटें आई.

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