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J&K: जम्मू प्रशासन ने भारी विरोध के बीच लिया यू-टर्न, बाहरी लोगों को ‘वोटर’ बनाने का फैसला पलटा

इससे पहले जम्मू प्रशासन की ओर से सभी तहसीलदारों और रेवेन्यू ऑफिसरों को आदेश दिया गया है कि वे एक साल से शहर में रह रहे लोगों को निवास का प्रमाण पत्र जारी करें. इस सर्टिफिकेट के आधार पर एक साल से जम्मू में रह रहे लोगों को वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा. इस आदेश को लेकर बवाल शुरू हो गया था.

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद एक बार फिर से विधानसभा चुनाव को लेकर कवायद चल रही है. चुनाव आयोग इसी साल राज्य में विधानसभा चुनाव करा सकता है. चुनावों की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इस बीच जम्मू जिले की उपायुक्त (DC) अवनी लवासा ने एक साल से ज्यादा समय से रह रहे बाहरी लोगों को भी वोटिंग का अधिकार देने की घोषणा की थी. जिसका काफी विरोध हुआ था. भारी विरोध के बाद जम्मू प्रशासन ने अपने फैसले से पलटी मार ली है.

इस खबर में ये है खास

  • तहसीलदार देता निवास प्रमाण पत्र
  • विपक्षी एकजुटता काम आई
  • बीजेपी पर NC का गंभीर आरोप

तहसीलदार देता निवास प्रमाण पत्र

इससे पहले जम्मू प्रशासन की ओर से सभी तहसीलदारों और रेवेन्यू ऑफिसरों को आदेश दिया गया है कि वे एक साल से शहर में रह रहे लोगों को निवास का प्रमाण पत्र जारी करें. इस सर्टिफिकेट के आधार पर एक साल से जम्मू में रह रहे लोगों को वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा. इस आदेश को लेकर बवाल शुरू हो गया था. तमाम राजनीतिक दलों के विरोध को देखते हुए जम्मू प्रशासन ने अब अपना फैसला वापस ले लिया है.

विपक्षी एकजुटता काम आई

बाहरी लोगों को वोटिंग के अधिकार मामले में बीजेपी के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट हो गया था. पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इस मामले में बीजेपी पर प्रदेश को धार्मिक आधार पर बांटने का आरोप लगाया था. मुफ्ती ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर को धार्मिक और क्षेत्रीय स्तर पर बांटने के कथित प्रयासों को विफल किया जाना चाहिए, क्योंकि चाहे वह कश्मीरी हो या डोगरा, हमारी पहचान और अधिकारों की रक्षा तभी संभव होगी जब हम एक साथ आकर कोशिश करेंगे.

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बीजेपी पर NC का गंभीर आरोप

वहीं नेशनल कांफ्रेंस ने भी इस मामले में बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. नेशनल कांफ्रेंस ने कहा था कि जिस तरह से करगिल व लेह, लद्दाख के लोगों ने बीजेपी की फूट डालो और राज करो की नीति को विफल कर दिया और अपनी जमीन व रोजगार बचाने के लिए एकजुट हुए, उसी तरह जम्मू-कश्मीर के लोगों को बीजेपी के नापाक इरादों को नाकाम करने के लिए एकजुट होना होगा, क्योंकि बाहर के लोगों को इससे केवल यहां घर ही नहीं मिलेंगे. बल्कि उन्हें मताधिकार भी मिलेगा जिसका मतलब जम्मू-कश्मीर के लोगों के वोट का महत्व कम होगा.