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Uttar Pradesh

रामलला के लिए दिल खोलकर दान कर रहे श्रद्धालु, 2 करोड़ तक हर महीने आ रहा चढ़ावा

अयोध्या: 500 साल का इंतजार खत्म होने जा रहा है, 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है. इसे लेकर हर कोई उत्साहित दिख रहा है. लोगों ने तो राम मंदिर दर्शन के प्लान भी तैयार कर लिए हैं. अभी प्राण प्रतिष्ठा भी नहीं हुई है लेकिन श्रद्धालु रामलला के… Continue reading रामलला के लिए दिल खोलकर दान कर रहे श्रद्धालु, 2 करोड़ तक हर महीने आ रहा चढ़ावा

अयोध्या: 500 साल का इंतजार खत्म होने जा रहा है, 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है. इसे लेकर हर कोई उत्साहित दिख रहा है. लोगों ने तो राम मंदिर दर्शन के प्लान भी तैयार कर लिए हैं. अभी प्राण प्रतिष्ठा भी नहीं हुई है लेकिन श्रद्धालु रामलला के दरबार में दिल खोलकर दान दे रहे हैं. आंकड़ों की बात करें तो इन दिनो हर रोज 3 से 4 लाख रूपए तथा महीने में तकरीबन 2 करोड़ रूपए बतौर चढ़ावा आ रहा है. वहीं ऐसा माना जा रहा है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद इन आंकड़ों में चार गुना की बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं ऑनलाइन दान की अभी तक कोई काउंटिंग नहीं हो पाई है.

प्राण प्रतिष्ठा के बाद दान में होगी भारी बढ़ोतरी

22 जनवरी 2024 को भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में लाखों भक्त पहुंचेंगे. वे यहां भगवान श्रीराम का दर्शन पूजन करेंगे और अपने इच्छा भाव से श्रीराम मंदिर के लिए दान भी करेंगे. फिलहाल यहां अस्थायी मंदिर में भी अपने रामलला के दर्शन-पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी है. अपनी श्रद्धा से दान करने वालों का यह आलम तब है, जब भगवान श्री रामलला अपने अस्थायी मंदिर में हैं. जब वे अपने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे तो इसका कोई अंदाजा नहीं है कि प्रतिदिन कितना दान आएगा. हालांकि यह जरूर है कि मंदिर बन जाने के बाद श्रद्धालुओं की ओर से दान-चढ़ावे का आंकड़ा चार गुना बढ़ जाएगा.

जिसकी जितनी हैसियत उतना दे रहा दान
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता के मुताबिक हमारे यहां दान पात्रों में रोजाना धन पड़ता है. जब भर जाता है तब उसकी गिनती होती है. कैसे कह दिया जाए कितना आ रहा है, लेकिन काउंटर पर जो आ रहा है, वह प्रतिदिन तीन से चार लाख के बीच है. महीने में लगभग डेढ़ करोड़ रुपए आ रहा है. दानदाताओं की कमी नहीं है. अपने सामर्थ्य से लोग बढ़चढ़ कर दान दे रहे हैं. लोग अनोखी अनोखी चीजें भी बनवाकर ला रहे हैं. लोग सोच रहे हैं कि भगवान के लिए क्या कर दें. लोग जो कर रहे हैं, हम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.