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मेरठ: ज़िला जज और डीएम ने बेसहारा बच्चों का शिक्षा से जोड़ा नाता

निदा फाज़ली का एक शेर है ‘‘बच्चों के नन्हें हाथों को चांद-सितारें छूने दो, चार किताबें पढ़कर ये भी हम जैसे हो जाएंगे’’ और इन अल्फाज़ों के एहसास को मेरठ के ज़िला जज रजत जैन और डीएम और दीपक मीणा ने समझा और किसी ना किसी हालातों में अपनो से बिछड़कर राजकीय बाल गृह मे… Continue reading मेरठ: ज़िला जज और डीएम ने बेसहारा बच्चों का शिक्षा से जोड़ा नाता

निदा फाज़ली का एक शेर है ‘‘बच्चों के नन्हें हाथों को चांद-सितारें छूने दो, चार किताबें पढ़कर ये भी हम जैसे हो जाएंगे’’ और इन अल्फाज़ों के एहसास को मेरठ के ज़िला जज रजत जैन और डीएम और दीपक मीणा ने समझा और किसी ना किसी हालातों में अपनो से बिछड़कर राजकीय बाल गृह मे रहे बच्चों का नाता शिक्षा से जोड़ दिया. मेरठ में शिक्षा के उजियारें में अपनी जिन्दगी को रोशन कर रहे बच्चें बेहद खुश है इनमें से किसी की आंखों में आईएएस, आईपीएस तो किसी की आंखों में डाक्टर या इंजीनियर बनने का सपना पल रहा है और इन सपनों को उंची उड़ान देने के लिए जिला जज मेरठ और डीएम मेरठ ने पहल की. दरअसल राजकीय बाल गृह में एक दौरे के दौरान जिला जज रजत जैन और डीएम दीपक मीणा ने वहां रहने वाले बच्चों से पढ़ाई को लेकर बातचीत की थी. जिसमें बच्चों ने पढ़ाई को लेकर उत्सुकता दिखाई थी और फिर उसके बाद बाकायदा बच्चों को डाटा तैयार किया गया.

चलो चले स्कूल, बनाएं भविष्य अनमोल

ज़िला जज के आदेश के बाद ज़िला प्रशासन की ओर से प्रोबेशन अधिकारी द्वारा ऐसे बच्चों का डाटा तैयार करने के बाद जो स्कूल जाना चाहते है…उनको मेरठ शहर के अच्छे स्कूलों में पढ़ाने के लिए संपर्क किया गया और फिर उसके बाद उनका एडमिशन हो गया. बता दें कि राजकीय बाल गृह में अपनों से जुदा हुए करीब 21 बच्चें है जिनमें से 14 बच्चों ने स्कूल जाना शुरू कर दिया है. दरअसल पहले तो कक्षा पांच तक की पढ़ाई के लिए इन बच्चों को एडमिशन मेरठ के पूर्वा अहिरान के कंपोज़िट विद्यालय में कराया गया और वहां से अच्छे नंबरों से कक्षा पांच पास कर चुके बच्चें अब मेरठ के नामी गिरामी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ाई कर रहे है. सूरजकुंड स्थित राजकीय बाल गृह के बच्चों का भविष्य सुधारने के लिए स्कूल जाने वाले 14 बच्चों के तीन ग्रुप बनाए गए और फिर उनका उस हिसाब से एडमिशन कराया गया. जिसमें पांच बच्चें सूरजकुंड स्थित एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में है तो पांच बच्चें फूलबाग कॉलोनी के एक स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे है और चार बच्चें दूसरें स्कूल में है जबकि हायर एजूकेशन के लिए दो बच्चें मेरठ के प्रतिष्ठित स्कूलों में अपना भविष्य सुनहरा कर रहे है. बता दें कि राजकीय बाल गृह से बच्चों को स्कूल ले जाने और वहां से लानें के लिए ज़िला प्रशासन की ओर से वैन की व्यवस्था भी कीगई है और समय समय पर राजकीय बाल गृह के अधीक्षक के माध्यम से डीएम दीपक मीणा लगातार रिपोर्ट लेते है और पढने वाले बच्चों की ज़रूरतों को पूरा करने के भी निर्देश देते है.

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