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Uttar Pradesh

Swami Prasad Maurya ने इस्तीफा दिया या फिर लिया गया, पढ़िये इनसाइड स्टोरी

Swami Prasad Maurya resign : स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लिखा है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव पद को लेकर पार्टी में भेदभाव लगाने का आरोप लगाया है.

Swami Prasad Maurya resign from the post of Samajwadi Party General Secretary
Swami Prasad Maurya resign from the post of Samajwadi Party General Secretary

Swami Prasad Maurya: हिंदू धर्म समेत अन्य मुद्दों पर विवादित बयानों के चलते लगातार चर्चा में स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को सपा के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने एक पत्र भी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लिखा है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव पद को लेकर पार्टी में भेदभाव लगाने का आरोप लगाया है. उन्होंने इसके साथ ही यह भी कहा कि महत्वहीन पद पर बने रहने का कोई कारण नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भेदभाव की वजह से ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद से वो त्यागपत्र दे रहे हैं.

लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर दिया इस्तीफा !

राजनीति के जानकारों की मानें तो स्वामी प्रसाद मौर्य से इस्तीफा लिया गया है. दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 में चंद महीने शेष हैं और स्वामी प्रसाद मौर्य के हिंदू विरोधी बयानों के चलते ब्राह्मण समुदाय के साथ समाजवादी पार्टी के कई नेताओं में ही गहरी नाराजगी थी. सपा के ब्राह्मण नेता कई बार अखिलेश यादव से शिकायत कर चुके थे.

आजिज आकर लिया इस्तीफा

बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार ऐसे बयान दे रहे थे, जिससे सपा की छवि खराब हो रही थी. समाजवादी पार्टी के कई दिग्गज नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर टिप्पणी करने तक से बच रहे थे. पिछले दिनों ही समाजवादी पार्टी के विधायक और अखिलेश यादव के करीबी नेता मनोज पांडेय ने स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर कहा था कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो चुके हैं.

इस्तीफे में कही बड़ी बात

स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव को भेजे पत्र में लिखा- सेवा में, प्रिय महोदय….जबसे मैं समाजवादी पार्टी में सम्मिलित हुआ, लगातार जनाधार बढ़ाने की कोशिश की. सपा में शामिल होने के दिन ही मैंने नारा दिया था “पच्चासीर हमारा है, 15 में भी बंटवारा है”. हमारे महापुरुषों ने भी इसी तरह की लाइन खींची थी.

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भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने “बहुजन हिताय बहुजन सुखाय” की बात की तो डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कहा कि “सोशलिस्टो ने बांधी गांठ, पिछड़ा पावै सो में साठ”, शहीद जगदेव बाबू कुशवाहा व मा. रामस्वरूप वर्मा जी ने कहा था “सौ में नब्बे शोषित हैं, नब्बे भाग हमारा है”, इसी प्रकार सामाजिक परिवर्तन के महानायक काशीराम साहब का भी वही था नारा “85 बनाम 15 का”.

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