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Faiz Ahmed Faiz Birth Anniversary: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की ग़ज़लों से बेहतरीन 10 शेर

Faiz Ahmed Faiz Birth Anniversary: शायरी का शौक रखने वालों में ऐसा कोई नहीं होगा, जिसने फैज़ अहमद फैज़ का नाम ना सुना हो. फैज़ अहमद फैज़ ने अपनी कलम से उर्दू शायरी को एक नए मुकाम पर पहुंचाया.

10 beautiful couplets on the birth anniversary of famous poet Faiz Ahmed Faiz
10 beautiful couplets on the birth anniversary of famous poet Faiz Ahmed Faiz

Faiz Ahmed Faiz Birth Anniversary: 13 फरवरी 1911 को जन्में महान शायर फैज अहमद फैज को जयंती पर जमाना याद कर रहा है. उनकी जयंती पर पाकिस्तान के साथ-साथ पूरे दक्षिण एशिया के देशों में आयोजन होते हैं. शायरी का शौक रखने वालों में ऐसा कोई नहीं होगा, जिसने फैज़ अहमद फैज़ का नाम ना सुना हो.

जेल भी जाना पड़ा था फैज को

फैज़ अहमद फैज़ का जन्म 13 फरवरी, 1911 में पंजाब के सियालकोट जिले (जो किअब पाकिस्तान में है) हुआ था. वहीं, अगर देखा जाए तो आज उनकी लोकप्रियता पाकिस्तान से ज्यादा भारत में हैं. बहुत कम लोग जानते होंगे कि उन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में भी अपनी सेवाएं दी हैं. वह बहुत ही क्रांतिकारी स्वभाव के थे, जिसकी वजह से उन्हें काफी समय जेल में बिताना पड़ा था.

उर्दू शायरी को नए मुकाम पर पहुंचाया

फैज़ अहमद फैज़ अपनी बुलंद आवाज को बंटवारे के बाद पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ उठाया था, जिसकी वजह से उन्हें देश निकाला की भी सजा दी गई. फैज़ अहमद फैज़ ने अपनी कलम से उर्दू शायरी को एक नए मुकाम पर पहुंचाया. फैज़ अहमद फैज़ को शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया. यहां तक की इन्हें नोबल पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया था. शायद ही कोई गायक होगा जिसने इनकी नज्मों को ना गाया हो.

दिल को पढ़ कर सुकुन आ जाए पेश हैं फैज़ अहमद फैज़ के चंद शेर

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है

कर रहा था ग़म-ए-जहां का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए

और क्या देखने को बाक़ी है
आप से दिल लगा के देख लिया

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

इक गुल के मुरझाने पर क्या गुलशन में कोहराम मचा
इक चेहरा कुम्हला जाने से कितने दिल नाशाद हुए

वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न था
वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है

तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले

फैज़ अहमद फैज़ जैसी हस्तियां चली तो जाती हैं पर हमेशा के लिए अपनी याद अपनी कला के जरिए लाखों लोगों के दिलो में छोड़ जाती हैं. उनके हुनर से आज भी दुनियाभर के करोड़ों लोग प्ररेणा लेते हैं.

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